Normal body temperature in Hindi

शरीर के स्वाभाविक तापमान में अधिक वृद्धि हो जाने को ज्वार या बुखार (fever) कहा जाता है। शरीर के किसी भाग अथवा अवयव में जब कोई सूजन उत्पन्न होता है अथवा शरीर के रक्त में कोई विष प्रविष्ट होता है उस समय शरीर के स्वाभाविक तापमान में वृद्धि होनी शुरू हो जाती है। जब कोई जीवाणु या विषाणु हमारे शरीर में प्रवेश करता है, तब हमारा रोग प्रतिरोधक क्षमता उस जीवाणु और विषाणु को खत्म करने के लिए काम शुरू करता हैं। मनुष्य की शारीरिक तापमान भी उनमें से एक है, जब कोई बाहरी विष यानी जीवाणु या विषाणु हमारे शरीर में प्रवेश करता है तो हमारे शरीर के स्वभाविक तापमान में वृद्धि होने लगती है, ताकि उस बाहरी विष या जीवाणु और विषाणु को खत्म किया जा सके उसी बढ़ हुए शारीरिक तापमान को बुखार या ज्वर कहा जाता है।

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 मनुष्य की समान्य शारीरिक तापमान : Normal body temperature of Human in Hindi.

मनुष्य के शरीर का स्वाभाविक तापमान 97 डिग्री से 98.5 डिग्री फारेनहाइट (97°F to 98.5°F) तक माना गया है। जब शरीर का तापमान 98.5 डिग्री फारेनहाइट से अधिक हो जाता है तो उसे ज्वार यानी बुखार किस संज्ञा दी जाती है।

ज्वर के प्रकार : Types of fever

जिस प्रकार बुखार होने के अनेक कारण होते हैं, उसी प्रकार ज्वार की कितने भी अलग-अलग पाई जाती हैं बुखार के अलग-अलग कितने निम्नलिखित हैं।

  • सामान्य ज्वर ( simple fever)
  • सर्दी का ज्वर(Catarrhal fever)
  • अविराम ज्वर (Continued fever)
  • स्वल्प ज्वर (Remitent fever)
  • सविराम ज्वर अथवा विषम ज्वर (Intermittent Fever)

ऊपर दिए हुए सभी ज्वर के प्रकार विभिन्न कारणों से उत्पन्न होते हैं।

सामान्य ज्वर

सामान्य ज्वर मुख्य रूप से तेज धूप में घूमने, सर्दी लगने, बरसाती पानी में भीगने, अत्यधिक परिश्रम करने अथवा अधिक खाने-पीने आदि कारणों से जब शरीर का तापमान (Normal body temperature) बढ़ जाता है तो उसे सामान्य ज्वर या बुखार कहा जाता है।

सर्दी का बुखार

सर्दी का ज्वर मुख्य रूप से सर्दी लगने के कारण, ओस में रहने के कारण, पानी से भीगने के कारण, पेट के गर्म होने या गैस होने के कारण, अचानक गर्मी से सर्दी में जा पहुंचने के कारण, निकलते हुए पसीने को अचानक बंद कर देने के कारण तथा दही खट्टा आदि स्लेष्माकारक वस्तुओं के अधिक सेवन करने से जो ज्वर उत्पन्न होता है उसे सर्दी का ज्वर कहा जाता है।

अविराम ज्वर

अविराम ज्वर मुख्य रूप से ऋतु परिवर्तन होने के कारण, गर्मी अथवा सर्दी के अधिक लगने के कारण, गीले वस्त्र पहनने के कारण, पसीना आना अचानक बंद होने के कारण, अधिक खानपान अथवा शारीरिक या मानसिक परिश्रम के कारण, रात्रि जागरण के कारण, कब्ज तथा शरीर का मैल बाहर न निकल पाने के कारण आदि कारणों से शरीर का समान्य तापमान बढ़ जाता है उसे अविराम ज्वर कहा जाता है। 

स्वल्पविराम ज्वर तथा सविराम ज्वर

स्वल्पविराम ज्वर मुख्य रूप से मलेरिया रोग के कीटाणुओं के शरीर में प्रविष्ट हो जाने के कारण शरीर के तापमान में जो वृद्धि होती है उसे स्वल्प विराम ज्वर तथा सविराम ज्वर कहा जाता है।

ऊपर दिए गए जेवरों के प्रकार के अतिरिक्त और भी ज्वर है, जिनमें मनुष्य का शारीरिक तापमान सामान्य (normal body temperature) से अधिक हो जाता है। जैसे

  • पीला ज्वर
  • लाल ज्वर
  • काला ज्वर
  • डेंगू ज्वर
  • मोह ज्वर
  • ग्रंथिल ज्वर
  • आंतरिक ज्वर
  • माल्टा ज्वर

आदि विभिन्न प्रकार के ज्वर भी विभिन्न कारणों से उत्पन्न होते हैं।

  • नासा ज्वर
  • निमोनिया ज्वर
  • प्रसूति ज्वर
  • दुग्ध ज्वर
  • चेचक ज्वर
  • खसरा ज्वर
  • प्लेग ज्वर

आदि में भी शरीर का तापमान बढ़ जाता है आत: इन सभी रोगों का उपचार ज्वर के भांति ही की जाती है। किसी भी प्रकार के ज्वर का उपचार करते समय उसके नाम पर ध्यान न देकर उसके लक्षणों के आधार पर ही औषधि का चयन करना चाहिए।


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